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Monday, December 16, 2013

पर गलती तो हमारी है



आज पुरे एक साल हो गए
उस भयानक रात को गुजरे 
पर क्या कुछ बदला है ?
कैसे बदलेगा ?
क्युकी 
गलती तो हमारी है ,

हम घर से बहार 
रात हो या दिन अकेले 
नहीं निकल सकते ,
क्युकी आज़ाद देश मे
हम आज़ाद नहीं  
पर गलती तो हमारी है ,

हम कपड़े पहनते है 
पर फिर भी लोग 
कपड़ो के निचे का 
तन देखते हैं 
पर गलती तो हमारी है ,

मोबाइल फ़ोन पर एप्प्स 
हाँथ मे चिल्ली स्प्रे लेकर 
हम चलते हैं 
फिर भी हम सुरक्षित नहीं 
पर गलती तो हमारी है ,

इस धरती पर हम जन्मे 
घर मे लाड़ प्यार से पले 
देवी बन कर पूजे गए ,
जिन हाँथो ने पूजा 
उन्हींने फिर अस्मत लुटा 
हम लुटे गए उसमे भी 
गलती हमारी है ,

ऐ भगवन 
नारी रूप मे इस धरती पर 
बार बार जन्म देना 
ताकि बार बार हम ये 
साबित करते रहे की 
नारी का जन्म 
गलती नहीं है 
वो लूट और भोग कि 
वस्तु नहीं है,
वो एक शक्ति का स्वरुप है। 


रेवा 



Sunday, December 8, 2013

जुदाई के पल




आज जब मैंने तुमसे बात की
तो मैं रो पड़ी
क्युकी कुछ महीनों के लिए
तुम दूर जो हो मुझसे ,
पर तुम हँस पड़े
और कहा ,
"दूर कहाँ
हमेशा तो मैं तुम्हारे साथ हूँ
तुम्हारे दिल मे ,
बस उस साथ को
महसूस करो ,
जुदाई के
एक एक पल को
हमारे प्यार से
इस कदर भर दो की
जब हम पीछे मुड़
कर देखें
तो हमारा मन
हमारे प्यार और संयम
को देखकर
दुगुने प्यार से भर उठे "
क्या बताऊँ तुम्हे की
तुम्हारी इन बातों को सुन कर
सारा गम
आँसू  बन कर बह गया
और रेह गया बस प्यार।


रेवा 

Friday, December 6, 2013

माँ बाप और बच्चे





ज़िन्दगी का हर पड़ाव हमे कुछ न कुछ सिखाता है। 


आज खड़े हैं हम वहाँ जहाँ कभी हमारे माँ बाप थे 
हम भी सुनते है वो जवाब बच्चों से 
जो कभी वो हमसे सुना करते थे ,
आज टूटता है हमारा भी दिल 
जब बच्चे कुछ "पूछने" को "टोकने "
का नाम देते हैं ,
आज हम भी रोते हैं जब 
अपने दिल के टुकड़ों कि चिंता को 
"टेन्शन" और "ओवर रियेक्ट" का नाम 
दिया जाता हैं। 
आज हम भी सोच मे पड़ जातें हैं जब 
उन्हें हर छोटी बड़ी बात सिखाने के बाद  
सुनते है "आप नहीं समझोगे ",
आपका जमाना कुछ और था 
हमारा कुछ और ,
तब हम अपने माँ बाप 
का नजरिया नहीं समझते थे 
और आज हमारे बच्चे हमारा,
शायद ये प्रक्रिया चलती रहेगी हमेशा 
अंत मे ये कहूँगी 

"नमन हर माँ बाप को 
उनके संयम और प्यार को 
उनके रूप में 
धरती पर बसे
भगवान् को "

रेवा 

Monday, December 2, 2013

सृजन से दूर



इन दिनों काफी मसरूफ रही
ज्यादा कुछ तो नहीं हुआ ,
पर मैं सृजन कि दुनिया
से दूर हो गयी ,
ऐसा लगा मानो
अपनी रूह से जुदा हो गयी ,
बिना अपने एहसासों को
व्यक्त किये
जीना कितना दुश्वार है
ये पता चला ,
लगा जैसे
बहते पानी को
रोक दिया है किसी ने ,
आज मैं तहे दिल से
उस लम्हे का शुक्रिया
करना चाहती हूँ
जिस लम्हे मैंने
अपने एहसासों को
व्यक्त करना शुरू किया
और आप सब का भी
आपने मेरा  भरपूर साथ दिया।

"कविता जगत को कोटि कोटि धन्यवाद "


 रेवा


Friday, November 22, 2013

माँ



"माँ "

इस शब्द मे कितना प्यार
कितनी ममता छिपी है ,
माँ सुनते ,बोलते ही
मन प्यार से भर उठता है ,
पर हम बेटियों का नसीब देखो
दूर बैठे कभी जब
मन तड़प उठता है
माँ से मिल नहीं पाते ,
उनके गोद मे सर रख कर
उनका स्पर्श मेहसूस कर नहीं पाते ,
पर इस टेक्नोलॉजी के ज़माने ने
इतना तो एहसान किया है की
जब चाहे
उनकी आवाज़ सुन पाते  हैं /

"माँ तुझसे मिलने को मन है अधीर
 कैसे धरु अब धीर
या तो तू आजा , या मुझे  बुला ले
तेरी बेटी व्याकुल हो बहाये नीर "

रेवा






Sunday, November 17, 2013

सालों की मेहनत



मेरे सालों की
मेहनत रंग लायी 
मेरे प्यार और 
समर्पण ने 
अब तुम्हे भी 
प्यार करना 
सिखा ही दिया

अब मेरी मौज़ को
किनारा  ,
मेरे आँसुओं को
मंज़िल मिल गयी ,

मन तृप्त और संतुष्ट
हो गया ,
आखिर मेरे कान्हा ने
मेरी पुकार
मेरी गुहार सुन ली।

"जब लगा जीवन में
सबकुछ गयी हार ,
तो तूने लिया सम्भाल
भर दिया प्यार से मेरा संसार
कर दिया मुझे मालामाल "


रेवा 

Wednesday, November 13, 2013

फिर वही दर्द



हर बार क्यूँ
इस इम्तेहान
इस दर्द
के दौर से गुजरना
पड़ता है ,
मन लगाने के तो
कई साधन है,
पर वो जो
इस मन को सुकून दे
जिससे सब कुछ बाँट कर
मन हल्का हो सके ,
वो कहीं दूर
जा बैठा है ,
हमेशा सोचती हूँ
ये आखिरी बार है,
पर हर बार फिर
वही दर्द ,वहीँ कश्मकश
सामने खड़ा दीखता है ,


"जो तू नहीं मेरे पास
तो बस तन्हाई है आस-पास "

रेवा

Friday, November 8, 2013

तुम्हारी कविता



तुम्हारी प्यार भरी
बातों ने 
आज फिर 
कविता लिखने 
को प्रेरित किया ,
शुरू से लेकर अभी तक 
सारी रचनायें 
तुम्हारी ही तो हैं ,
मेरा तो उसमे 
कोई योगदान ही नहीं 
कभी तुझसे प्यार 
कभी तकरार लिखा ,
कभी तेरी बेरुखी 
कभी आंसुओं का हार लिखा ,
कभी विरह वेदना 
कभी अपना अंतर्नाद लिखा ,
कभी तेरी चाहत 
कभी अपना एहसास लिखा ,
हर बार तुझे ही पढ़ा 
तुझे ही लिखा 
तुझे ही सुना
तूझे ही गुना
क्यूंकि
मेरी ज़िन्दगी
तुम ही तो हो !!!!!



रेवा 


Friday, November 1, 2013

इंतज़ार



विरह कि बेला तो
सच मे बहुत
मुश्किल थी ,
पर जब
मिलन का समय
नज़दीक आने लगा तो ,
मन मे हज़ारों दीये
एक साथ जगमगाने लगे ,
लेकिन साथ ही साथ
इंतज़ार करना कठिन हो गया ,
एक एक पल जैसे
एक सदी बन गए ,
कितना कठिन होता है न
विरह और मिलन
के  बीच का इंतज़ार ,
पर शायद यही जीवन है
विरह मिलन के आनंद को
दुगना कर देता है,
जैसे दुःख
सुख़ के एहसास
को दुगना कर देता है।

रेवा



Wednesday, October 30, 2013





तेरे प्यार से भरी
दीये कि रौशनी सी
चमकती हैं मेरी आँखें

रेवा 

Thursday, October 24, 2013

तन्हा अकेली




नहीं रहना मुझे
तन्हा अकेली
बिना तेरी
मौजूदगी के ,
मानती हूँ
सिर्फ जिस्मानी मौजूदगी
मायने नहीं रखती
हम तो रूह से जुड़े हैं
पर फिर भी
नहीं रहना मुझे
तन्हा अकेली ,
सिर्फ तेरी यादों
के सहारे
सिर्फ तेरी बातों
के भरोसे ,
मानती हूँ
कुछ महीनों की
ही बात है ,
पर फिर भी
नहीं रहना मुझे
तन्हा अकेली ,
माना आंसुओं
को जगह नहीं देनी
आँखों मे
ये तेरी इल्तेज़ा थी
पर ये बरबस
तुझे याद करके
बहने लगे तो क्या करूँ ?
कैसे बहलाऊ ?
नहीं रहना मुझे
तन्हा अकेली /

"बिन तेरे सुना है संसार
  तू आजा ले के बहार "

रेवा


Thursday, October 17, 2013

इम्तेहान



सिर्फ एक दिन के लिए
तुम आये
और तुमने महका दिया
मेरा तन मन 
हमारा घर आंगन ,
अब जबकि तुम पास 
नहीं हो 
तो तुम्हारी खुशबू 
तुम्हारा वजूद 
हर तरफ महसूस
हो रहा है ,
ये हमारे साथ
हमारे प्यार और भरोसे
का इम्तेहान है ,
ये भी निकल जायेगा
और फिर हमारी
प्यार भरी बगिया
दुबारा मुस्कुरा उठेगी।

रेवा 

Friday, October 11, 2013

खोये एहसास




पहली बार ऐसा हुआ
१० दिन तक देखा तो नहीं तुझे
और आवाज़ भी नहीं सुनी ,
घर मे हर तरफ तेरी
मौजूदगी का एहसास
होता तो है ,
पर मौजूद होना
और बस एहसास होने मे
फरक है न ,

"आंखें हैं नम दिल है उदास
जाने क्यों खोये खोये से हैं हर एहसास ,
जीने को तो जी रहें हैं हम पर
मेरी जान नहीं मेरे पास "

रेवा


Saturday, October 5, 2013

स्वार्थी




बहुत मुश्किल है
इस विरह बेला से
अलबेला रहना ,
लाख कोशिशों
के बावजूद ,
आंसू बन ही गयें हैं
दिल की जुबान ,
हर प्यार भरे गीत पर
हर याद पर
हर बात पर
बरबस गलों को
गिला कर जातें हैं ,
आंसुओं पर
रोक लगाना मुश्किल
होता है न ,
और मेरे लिए
और भी मुश्किल ,
जानते हो न
तुम्हारे जाने से
पहले वाली रात
तुम्हारे कंधे पर
सर रख कर
सिसक उठी थी मैं ,
तुम कुछ न बोल पाए
बस चुप चाप
मेरे बालों को
सहलाते रहे ,
जानती हूँ आसान
तुम्हारे लिए भी नहीं ,
पर मुझे आज
अपना दर्द
ज्यादा महसूस हो रहा है
शायद स्वार्थी हो गयी हूँ मैं
पर तेरे प्यार के लिए !!

रेवा


Monday, September 30, 2013

दूरियां


जैसे जैसे तुम्हारे जाने का
वक़्त नज़दीक आ रहा है ,
मन अजीब सा हो रहा है
पर इन कुछ दिनों मे
जो पल तुम्हारे साथ बिताये
उन्हें अपना सहारा बनाउंगी
जब तुम्हार कंधे की याद आयेगी तो
तकिये पर सर टिका लिया करुँगी ,
आंसुओं से नहीं
तुम्हारी यादों से
खुद को भिगोउंगी ,
इतनी कशिश
इतनी शिद्दत से
तुम्हे अपने पास महसूस करुँगी की
तुम भी मुझे
प्यार किये बिना
न रह पाओगे
चाहे दूर से ही सही ,

"अपने प्यार की चांदनी मे भिगोना है तुझे
इन दूरियों को इस बार भरपूर जीना है हमे"

रेवा

Friday, September 27, 2013

मौन



मन की पीड़ा
मन की उलझने
बढती जा रही हैं निरंतर ,
मन क्लांत
तन शिथिल हो गया है ,
लग रहा है
एक प्रश्न चिन्ह जी रही हूँ मैं,
सब कोशिशे नाकाम हो रही हैं
दिशाहीन सा महसूस हो रहा है ,
अंततः अपने खोल मे सिमट कर
मौन ओढ़ लिया है मैंने ,
शायद कुछ दिनों का मौन
खुद का खुद से साक्षात्कार करवा
कोई राह दिखा सके /

"ऐसे मोड़ पर ले आयी है ज़िन्दगी
हर तरफ मिली है बस रुसवाई "

रेवा

Friday, September 20, 2013

तेरा प्यार मेरी आदत




तेरे बारे मे
सोचने बैठूं तो,
दिन कब शाम की
आगोश मे समां जाता है
पता ही नहीं चलता ,
कभी मुझे लगता है
तुम मुझसे
कितना प्यार करते हो,
ऐसे मेरी परवाह करते हो
जैसे चाँद अपनी चांदनी की
कभी लगता है
मुझे जरा भी नहीं मानते
ऐसे छोड़ दिया है मुझे
जैसे घर का पुराना सामान ,
इस ख्याल से ही
रोष और दुःख से भर उठती हूँ ,
पर अगले ही पल
ठंडी हवा के झोंके सी
तुम्हारी आवाज़ याद आ जाती है
और मैं तुम्हारी आवाज़
सुनने को आतुर हो उठती हूँ ,
कोशिश कर के भी
खुद को रोक नहीं पाती ,
खुद पहल कर के
तुझसे बात कर ही लेती हूँ ,
उफ़ ये तेरा प्यार
सच मे दीवाना बना दिया है मुझे

"तेरा प्यार मेरी आदत
और ये आदत
मेरी ज़िन्दगी बन गयी है "

रेवा

Saturday, September 14, 2013

मुझे प्यार है तुमसे



न मौत की ख़बर देते हैं
न ज़िन्दगी की
फिर कहते हैं
मुझे प्यार है तुमसे ,

अस्तित्वहीन कर
चले जाते हैं ज़िन्दगी से एक दिन,
सालों की दुरी के बाद
नींद से जागते हैं और
फिर कहते हैं
मुझे प्यार है तुमसे,

कहते हैं मर जाऊंगा तुम बिन ,
सुन लूँ तुम्हारी आवाज़ एक बार
फिर मौत भी आये तो गम नहीं
क्युकी मुझे प्यार है तुमसे

वाह रे प्यार
कब ज़ोर मारता है
कब थम जाता है
पता ही नहीं चलता ,
फिर भी बार बार
यही कहता है "मुझे प्यार है तुमसे"

रेवा

Saturday, September 7, 2013

क्षणिक मुलाकात






 "लग जा गले की फिर ये हसीं
  रात हो न हो शायद फिर इस जन्म मे
  मुलाकात हो न हो  "

आज जब ये गीत सुना तो
अचानक तेरी याद आ गयी
गीत लगा मेरी लिए ही बना हो  ,
तुझसे वो एक क्षणिक मुलाकात
स्मरण हो आया  ,
उस लम्हा जैसे वक़्त
रुक सा गया था ,
धड़कने मद्धम गति
से चलने लगी थी ,
और ये सुखद एहसास
बस तेरे करीब होने से हुआ था ,
ये आँखें
बरबस ही बेहने लगी ,
उस छोटी सी मुलाकात मे
ये अफ़सोस तो हमेशा रहेगा की
तुम्हे गले न लगा पाई ,
पर तुम कितने अच्छे इंसान हो
वो उस दिन पता चला  ,
आज भी मुझे खुद पर
गर्व महसूस होता है की
मैंने तुम्हे दिलोजान से प्यार किया /

रेवा


Thursday, September 5, 2013

शिक्षक दिवस और मेरे पापा


आज शिक्षक दिवस के दिन
अपने तमाम गुरुजनों के
साथ साथ मैं अपने सबसे बड़े गुरु
अपने पिता को नमन
करना चाहती हूँ ,
जीवन दान और कन्यादान के
साथ साथ जिंदगी
जीने का ज्ञान भी उन्होंने दिया ,
समाज मे सर उठा कर
जीने का सम्मान उन्होंने दिया ,
खाना बनाने से लेकर
हर छोटी बड़ी चीजों का
ज्ञान उन्होंने दिया ,
सदा मेरी सूरत देख कर
मेरी समस्यों का
निवारण उन्होंने किया ,
९ साल की छोटी सी उम्र मे
अपने माता पिता
और भाइयों को खोकर भी
जीवन से हार माने बिना ,
अपना बिज़नस खड़ा किया
और अपने परिवार का
भरन पोषण किया ,
आज वो इस दुनिया मे नहीं हैं
पर हर पल उनका
आशीर्वाद मेरे साथ है ,
पलकें भीगती जरूर है
उन्हें याद करके
पर चहरे पर फिर भी मुस्कान
बनी रहती है ,
मैं आज इश्वर से बार बार
ये कामना करती हूँ की
भगवान ! उनके जैसा गुरु
सबको दे।

"पापा मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ "

रेवा


Sunday, September 1, 2013

मूक एहसास



मुझे ख़ामोशियों से प्यार हो गया है
क्युकी वोही तेरी जुबान है
और अब मैंने उनसे
बात करना सीख लिया है,

नहीं करुँगी अब कोई
शिकवा शिकायत
तेरी चुप्पी मे अपने लिए
प्यार देखना सीख लिया है ,

बार बार नहीं पूछूँगी
तेरी उदासी का सबब
तेरी आँखों मे छुपी
उदासी पढना जो सीख लिया है ,

नहीं करुँगी अविश्वाश
तुझ पर
तेरे मूक एहसासों को
महसूस करना जो सीख लिया है

रेवा


Monday, August 26, 2013

"औरत"



कितने तप और पुण्य
के बाद मिलता है 
"औरत" का जन्म ,
तभी तो वो 
पैदा होने से लेकर 
मरने तक 
हर तरफ खुशियाँ 
बिखेरती है 
और हर तरह की जिम्मेदारी 
निभाती है ,
बचपन मे उसकी 
किल्कारियों से घर गूंजता है 
तो हर त्यौहार की रौनक भी 
होती है वो ,
शादी के बाद 
एक चार दिवारी को 
घर का दर्ज़ा देती है  ,
अपने त्याग और समझदारी की 
मिट्टी से सींच कर 
परिवार की मजबूत 
नींव तैयार करती है  ,
स्वं की इच्छा से पहले  
दूसरों की इच्छा का 
मान करती है ,
देवी देवताओं का आशीर्वाद 
है शायद उस पर 
तभी तो 
ये सब कर पाती है  ,
पर आज क्या हो रहा है 
उसके साथ ???
ये सब जानते है ,
बस एक दुआ, एक इल्तेज़ा है 
"औरत रूपी वरदान को 
अभिशाप मे न बदलो "

रेवा 


Saturday, August 24, 2013

नदी के दो किनारे




तुम कहते हो न
हम नदी के
दो किनारों की तरह हैं ,
हमेशा साथ-साथ
चलतें तो हैं
पर मिलते कभी नहीं ,
काश ! कभी कहीं
कोई रास्ता निकल आता ,
पर तुम कभी ये
क्यों नहीं सोचते की
हमारे बीच नदी की
मौज़ तो है
जो तुम्हे छु कर
मुझ तक
और मुझे छु कर
तुम तक पहुँच ही जाती  है
और हमेशा ये क्रम
चलता रहता है ,
फिर क्या हम
मेहेज़ दो अलग-अलग किनारे हुए।

रेवा


Tuesday, August 20, 2013

रिश्ते




उलझन भरी ज़िन्दगी मे
सुकून का एहसास
दिलाते हैं रिश्ते ,
गम की धुप को
छाँव मे बदलते हैं रिश्ते ,
हालातों की मार को भी
प्यार भरी थपकी
देते हैं रिश्ते ,
हो अगर प्यार भरा
तो फिर जीना आसां
करते हैं रिश्ते ,
पर सब रिश्तों से बड़ा है
खुद से खुद का रिश्ता
अगर ये बन जाये तो
"प्रयासों के गीत से
जीवन को संगीत बना दे ये रिश्ते "

रेवा


Thursday, August 15, 2013

क्यों कि आज Happy independence day है !!



हर साल इस दिन हम
देश के लिए मंगल कामना करते  हैं
फेसबुक पर फ़ोटो भी बदलते हैं ,
बधाई भी देते हैं
क्यों कि आज  " Happy independence day " है

देश मे माँ बहनों की इज्ज़त
के साथ खिलवाड़
बच्चियों तक के साथ बलात्कार
पर आज तो खुश हैं हम
क्यों कि आज  " Happy independence day " है


तेज़ाब से जल रहीं हैं
दहेज़ के लिए जलाई जा रही हैं बहनें  ,
बेटों के लिए बेटियों की
बलि चढ़ाई जा रही है
पर आज तो खुश हैं हम
क्यों कि आज  " Happy independence day " है

बच्चों को
mid day meal के नाम पर
ज़हर परोस रहे हैं
और उनको मरते देख रहे हैं
पर आज तो खुश हैं हम
क्यों कि आज  " Happy independence day " है

कहीं आतंकवाद
कहीं नेतावाद
कहीं विवाद
पर फिर भी आज तो खुश हैं हम
क्यों कि आज  " Happy independence day " है


रेवा 

Tuesday, August 6, 2013

मन के रिसते जख्म



तुम चाहते थे न
मैं चुप हो जाऊं
तुमसे न ज्यादा पूछूँ
न ज्यादा बातें करूँ ,
लो चुप हो गयी मैं अब
बन गयी एक मूक मूर्त ,
सब करती हूँ
घर के काम ,
तुमसे प्यार
तुम्हारी परवाह
तुम्हारा ख्याल ,
पर मैं अपने अन्दर
रोज़ कितने
जंग लड़ती हूँ
इसका शायद
अन्दाज़ा भी नहीं तुम्हे ,
हर लम्हा तुम्हे जानबुझ कर
अनदेखा करना
खून के घूँट पी कर
रह जाती हूँ ,
काश मैं
मूक ही पैदा होती ,
तन के जख्मो पर
मलहम लगा सकती हूँ
पर अपने मन के रिसते
जख्मों का क्या करूँ ?

रेवा 

Saturday, August 3, 2013

बोझिल दिल





पहले जब भी दिल
तुम्हारे होते हुए भी
तुम्हारे लिए तड़पता था
बोझिल हो जाता था ,
लगता था
शायद तुम्हें
मेरी भावनाएं
समझ ही नहीं आती ,
तो क्या फ़ायदा
खुद को कष्ट
और तुम्हे दोष देकर ,
पर अब
जब मैं जान गयी हूँ की
तुम इतने भी अनजान नहीं ,
अपने किये
और मेरी हालात
से वाकिफ हो  ,
तो किस तरह खुद को समझाऊं ?
क्या तुम्हारा
मन नहीं करता की
मुझे भी वो खुशियाँ
मिलनी चाहिए
जिनसे तुमने मुझे
अभी तक महरूम रखा है ,
पर अगर कोई
समझ के भी
नासमझ बना रहे तो
ये सवाल जवाब
सब बेकार  

"ये बोझिल दिल लिए सीने मे
क्या ख़ाक मज़ा है जीने मे "

रेवा


Tuesday, July 30, 2013

गृहणी

गृहणी को किस मिट्टी से
गढते हैं भगवान ?
उसका अपना कुछ भी क्यों नहीं होता ?
न उसकी इच्छा, न उसका मन
जब जिसका जैसे मन होता है
वो उस के साथ वैसा ही बर्ताव करता है ,
अगर पति का मन अच्छा नहीं
ऑफिस मे कुछ हुआ या फिर
और कोई बात हो तो  ,
झेलना पत्नी को है
उसकी कडवी बातें और ख़राब मूड दोनों ,
अगर बच्चों का मन अच्छा नहीं तो
झेलना माँ को है ,
अगर सास ससुर को कुछ नागवार गुजरा तो
झेलना बहू को है ,
इन सब मे उसका अपना मन
अपनी इच्छा कुछ मायने रखती है क्या ?
बस खुद को एक अच्छी पत्नी, माँ और बहु
साबित करती रहे ज़िन्दगी भर,
और खुद को भूल ही जाये
तभी ये जीवन चल सकता है सुख शांति से  ,
सदियाँ गुजर गयी
इक्कीसवी सदी के हैं हम लोग
पर एक गृहणी अभी भी वहीँ की वहीँ ,
गृहणी को किस मिट्टी से
गढ़ते हैं भगवान ?????

रेवा



Tuesday, July 23, 2013

बेगानी आंखें

आज तुमसे बात कर के
दिल थम गया
उस लम्हे मे
लगा साँसें रुक गयी हो ,
और तब
ये आँखें भी अजीब हो जाती हैं
लगता ही नहीं की मेरी आँखें हैं
ये तुम्हारे प्यार से सरोबार हो कर
बरसने लगती हैं ,
समझ ही नहीं आता की
इन्हे क्या हो जाता है ?
इतनी प्यार भरी बातें
ना किया करो तुम ,
इन आँखों को और मुझे
बेगाना ना किया करो तुम /

रेवा





Saturday, July 20, 2013

नखरालू बादल

ये बादल भी न बिलकुल
तुम्हारी तरह नखरालू हैं
अपने होने का एहसास कराते हैं
फिर बिन बरसे चले जातें हैं ,

आसमान पर रोज़ छा जातें हैं
लगता है बस अब बरसे
तब बरसे
पर दिन ढलते ढलते
रूठ कर छिप जातें हैं ?

फिर से आ जाती है
हलकी सी धुप,

क्यों तड़पाते हो इतना ?
कभी तो टूट कर बरसो
तपते मन की तृष्णा शांत करो ,

देखो अब न बरसे
तो रूठ कर चली जाउंगी
फिर न कहना
" मेरे प्यार की बरसात मे
  भिगो न आज "

रेवा



Wednesday, July 10, 2013

माँ

माँ के बारे मे
हर रोज़ कितना कुछ लिखते हैं लोग
फिर भी बहुत कुछ अनकहा रह जाता है ,
'माँ ' ये शब्द ही इतना प्यारा है की
सोचने भर से मन प्यार से भर उठता है /

जानती थी माँ बड़ी बेटी है सामर्थवान
इसलिए रहती थी निश्चिन्त उसकी तरफ से
पर पता था उसे
छोटी कभी कुछ बोलती नहीं
पर दिक्कतों से चलाती है अपना घर संसार ,
माँ के पास भी धन नहीं था ज्यादा
फिर भी खुद पर एक पैसा खर्च नहीं करती थी
जोड़ जोड़ कर रखती और किसी बहाने से
छोटी को थमा देती ,
लाख मना करती छोटी
पर एक न सुनती माँ ,
ज्यादा बोलती छोटी तो रोने लगती
छोटी की एक न चलती ,
उसे ये भी समझाती
न बोलना बड़ी को वर्ना
उसे लगेगा बहनों मे भेद करती है माँ ,
माँ का ये भी एक रूप है
मरते दम तक बस अपने
सब बच्चों को खुशियाँ ही देना चाहती है ,
कभी कोई पूरी तरह
माँ को परिभाषित न कर पाया है
न कर पायेगा /

रेवा

Friday, July 5, 2013

छोटी सी बूंद

कविता के सागर मे
जब गोता लगाया तो
पाया की इस गहरे सागर में
बहुत कुछ छिपा है,
कई सीप
कुछ छोटे ,कुछ चमकीले
और कईयों के अन्दर मोती भी मिले  ,
सागर मे आती लहरों
और नदियों को देखा और जाना
तो लगा की
इस सागर मे तो मैं
एक छोटी सी बूंद हूँ
जो अपना अस्तित्व
तलाशने की जद्दो जेहद मे लगी है ,
इस आशा मे की शायद कभी
वो भी एक लहर बन जाये /


रेवा


Wednesday, July 3, 2013

पिया सदा निभाना मेरा साथ

कितना अलग हुआ आकाश 
मन मयूर बन डोले आज
मदहोश हुए मेरे ज़ज्बात
बांधू गीतों मे  इन को या
हवा में बहने दूँ एहसास ,
ख्वाबों ने दे दी है दस्तक
जाने क्या हो जाएगा अब
बिना बात मुस्कुराने कि
होगी अब तो शुरूआत
या भीग़ जाएँगी पलकें
कर तुझे यूं ही याद ,
या सूख जाएगी ये धरती 
बिन बादल और बिन बरसात ,
पर जैसे भी हो मेरे जज्बात 
एक बात तुझे कहनी है आज 

"पिया सदा निभाना मेरा साथ "


रेवा











Saturday, June 29, 2013

न मौत है न ज़िन्दगी

न कोई ख्वाइश है
न ख्वाब
न कोई जुस्तजू है
न आरज़ू  ,
न इल्तेज़ा है
न फ़रमाइश
न दुआ है
न मन्नत ,
न दौलत है
न शौहरत
न प्यार है
न विसाले यार,
हवा ने ऐसा रुख मोड़ा कि
न मौत है
न ज़िन्दगी /

रेवा


Thursday, June 27, 2013

net chatting

नेट पर बात करना क्या गुनाह है , शायद हम औरतों को ऐसा नहीं करना चाहिए ..........अनजान लोगो से तो बिलकुल भी नहीं / आप शादी शुदा हो सामने वाला भी है ,फिर भी लोग फ़्लर्ट करने से बाज़ नहीं आते ,
मेरी सहेली को मेरे ही friendlist से किसी ने रिक्वेस्ट भेजा , उसने ऐड कर लिया ,उसे लगा मैं जानती हूँ तो अच्छा ही होगा , दो दिन की बातों मे ही उस बन्दे ने फ्लिर्टिंग करनी शुरू कर दी , फिर आखिर उसने उसे  unfriend कर दिया ,फिर मुझे सारी बात बताई / ऐसा पहले मेरे साथ भी हुआ था , मुझे इन सब के पीछे मानसिकता समझ नहीं आती /

Wednesday, June 26, 2013

"बदलाव ही जीवन है "

कहते हैं
शब्दों के द्वारा
मन के भावों को
व्यक्त किया जा सकता है
पर जब मन मे
तूफान उठा हो
हर तरफ उथल पुथल मची हो
तो न शब्द साथ देते हैं
न मन ...
समुद्र के तूफ़ान को शांत करना
जितना मुश्किल है
उतना ही कभी कभी
मन मे उठे तूफ़ान को रोकना
या उसकी दिशा बदलना ,
ऐसे मे अगर कुछ साथ देता है तो बस
एक विश्वाश की ये स्तिथि भी
बदल जाएगी क्युकी
"बदलाव ही जीवन है "


रेवा

Saturday, June 22, 2013

इस दशा के लिए हम ही जिम्मेदार हैं

हमने जब कुदरत से छेड़ छाड़ करी
तो हमारी जरूरत 
जब कुदरत ने उत्तर दिया 
तो वो निर्मम ,
हमने नदियों को बांधा 
उनका रुख मोड़ने की कोशिश की 
तो हमारी जरूरत 
जब वहीँ नदियों ने उफन कर 
बाढ़ का रूप ले लिया 
तो वो निर्मम ,
हमने पहाड़ों को खोखला 
कर दिया 
तो हमारी जरूरत 
उन्ही पहाड़ों ने जवाब दिया 
तो वो निर्मम ,
पेड़ों को काट काट धराशाई किया 
तो हमारी जरूरत 
मौसम ने जब अपने  दिखाए 
तो वो निर्मम 
वाह रे इंसान यहाँ भी बस अपने बारे मे सोचा 
इसलिए शायद आज इस दशा के लिए हम ही जिम्मेदार हैं 

रेवा 






Thursday, June 20, 2013

तो करार आये

एक बार तुझसे रूबरू मिल लूँ
तो करार आये ,
एक बार तेरी प्यार भरी बातें सुन लूँ
तो करार आये ,
एक बार तेरा लाड़ ,तेरा प्यार वो महसूस कर लूँ
तो करार आये ,
एक बार तुझसे "मेरी लाडो " सुन लूँ
तो करार आये ,
एक बार तेरी आवाज़ मे खुद को डुबो लूँ
तो करार आये ,
एक बार तुझे अपने आगोश मे भर लूँ
तो करार आये ,
तेरे साथ रहे बिना भी ,तेरे साथ जीती रहूँ
तो करार आये /

"प्यार मे तेरे जी कर सुकून पाया
समां कर तुझमे मैंने अपना वजूद पाया "


रेवा





Monday, June 17, 2013

"मरना है तेरे प्यार मे "

नहीं कहूँगी कभी की
मरना है तेरे प्यार मे,
मरने के लिए कौन कम्बखत
प्यार करता है ,
प्यार तो जीने का नाम है
मुझे तो हर छण
जीना है तेरे साथ ,
जीवन से
छोटे छोटे पल चुरा कर
उनमे खुशियाँ भरनी है
प्यार और एहसास भरने है ,
ऐसे जीना है की
ये उम्र भी छोटी पड़ जाये
हमारे प्यार के सामने ,
तो ऐ प्यार करने वालों
कभी न कहना "मरना है तेरे प्यार मे "

रेवा


Monday, June 10, 2013

वक़्त की धुल

आज बहुत दिनों बाद
अपनी पुरानी डायरी खोली,
जब उसके पन्ने पलटे
तो हर पन्ने के साथ
पुरानी सारी बातें
चलचित्र की भांति
आँखों के सामने आ गए ,
उन बीते
प्यार भरे पलों को
साँसों मे महसूस करने लगी  ,
उनकी खुशबू मुझे
फिर से बेक़रार करने लगी,
ऐसा लगा मानो
तुमसे अभी नयी-नयी मुलाकात हुई हो
वक़्त की धुल चाहे जितनी
पड़ जाये ,
पर एहसासों मे धुल कभी नहीं जमती .......

रेवा




Thursday, June 6, 2013

एक्सपायरी डेट




मुझे लगा था
ताउम्र निभा लुँगी ये रिश्ता ,
जैसे हर बात तुमसे
साँझा किया है आज तक 
आगे भी करुँगी 
पर शायद नहीं ,
कितने दिन चलता तुमसे 
ये बातों का सिलसिला  ?????
कभी तो ख़त्म होना था न 
मैं ही भूल गयी थी की 
हर चीज़ की उम्र होती है 
उसके बाद वो काम नहीं करती ,
जैसे हर चीज़ की
एक्सपायरी डेट होती है 
शायद आजकल रिश्ते भी 
एक्सपायरी डेट के साथ बनते हैं। 

रेवा 





Sunday, June 2, 2013

कृप्या मार्गदर्शन करें

एक सवाल आप सबसे ,कृप्या मार्गदर्शन करें

एक अंधविश्वाश या नहीं  ??

मेरे घर मे अक्सर बड़ों ने  कहा है , रात को आटा लगा कर यानि गुथ कर फ्रिज मे
नहीं रखना चाहिए ,दुसरे दिन काम मे लेने के लिए ......अगर लगा हुआ आटा रात का बच जाये
तो रोटी बना लो पर रखो मत .....अगर हम रख देते हैं तो उससे घर मे रुपये पैसे की
बरक्कत नहीं होती , कमाई होती है पर दिखती नहीं। पर मुझे ये एक अन्धविश्वाश
लगता है ,कोई सम्बन्ध ही नहीं लगता एक दुसरे से .............आप बताएं आपको क्या
लगता है ??????

रेवा

Saturday, June 1, 2013

ऐ बचपन

ऐ बचपन
आज फिर तेरी याद आयी
फिर हो गयी आंखें नम ,
तड़प उठा मन
जीने को हर वो छण ,
गुड्डे गुडिया की शादी
वो कबड्डी के खिलाड़ी ,
लुका छिप्पी का खेल
वो छोटी सी रेल ,
कभी होती थी रेस
कभी गुड्डी के पेंच ,
माँ को मनाना
थोड़ी देर और खेलने का बहाना ,
उफ़ वो दस पैसे की नारंगी टॉफ़ी
और खट्टे मीठे गोले ,
भैया से झगड़े
पापा से शिकायत
भैया की शामत ,
बात बात पे दुलार
ज़िद और प्यार ,
यहीं तो है अब बस मेरे पास
ऐ बचपन लौट आ न तू एक बार .....................


रेवा

Wednesday, May 29, 2013

क्या लिखूँ ?

क्या लिखूँ आज ?
मौसम का हाल या
प्यार का बुखार ,
दोस्ती का खुमार या
रिश्तों की गुहार  ,
ज़िन्दगी के ताने बाने या
अनकही  जज्बातें ,
या तेरी मेरी मुलाकातें
आज शायद कुछ नहीं क्युकी ,
जितनी भी कोशिश कर लो
रह ही जातें हैं
अपने कुछ अधलिखे ख्याल
जो चाह कर भी इन पन्नों पर
शब्द बन कर संवर नहीं पाते
और दे देते हैं एक अतृप्ति का भाव /

रेवा







Wednesday, May 22, 2013

तो क्या बात है

ज़माना ही बेवफ़ा है
तुमने बेवफ़ाई की तो
क्या बात है ,
दर्द तो ऐसे भी था सीने मे
तुमने दर्द दिया
तो क्या बात है ,
उपर से तो सभी छलनी करते हैं
तुमने दिल मे रह कर छला
तो क्या बात है ,
आंखें तो यूँ भी भर आती थी
तुमने उन्हें रोने का बहाना दे दिया
तो क्या बात है ,
तपती धुप मे बारिश सा एहसास देने वाले ने
बारिश के साथ रोना सिखा दिया
तो क्या बात है ,
तुम पर इन सारे इल्ज़ामो के बावजूद
मुझे तुमसे बेइन्तेहा प्यार है
तो क्या बात है /

रेवा


Saturday, May 18, 2013

अजीब आँसू

ये आँसू भी अजीब है
आँखों के कैदखाने मे 
उम्र भर कैद रहते हैं ,
फिर बिना आगाह किये
मन के भावों को पढ़
खुद को आज़ाद
कर लेते हैं ,
इतने छोटे से कैदखाने मे
इतने सारे आँसू
एक साथ रहते हैं ,
और इतनी ईमानदारी से 
ताउम्र  दर्द के साथ 
अपना रिश्ता निभाते हैं ,
क्या ये हमे ज़िन्दगी की 
बहुत बड़ी सीख नहीं देते ?

रेवा 



Thursday, May 16, 2013

एक पागल लड़की

सच मे वह पागल थी
प्यार के लिए पागल ,
सबसे अलग सांवली सी थी
साधारण रंग रूप
साधारण सपने ,
सबसे बड़े प्यार से मिलती
हर किसी को अपना बना लेती ,
कोई अगर प्यार के दो बोल
बोल दे तो बस
उसके सारे काम
ख़ुशी ख़ुशी कर देती थी ,
पर उस पगली को ये कहाँ पता था
कि उसे कभी प्यार हो जायेगा ,
पागल तो पहले ही थी
अब दीवानी भी हो गयी थी ,
दिलो जान से चाहा अपने प्यार को
बहुत भरोसा किया ,
पर टूट गया भरोसा
प्यार टूटता तो बात अलग थी ,
बिखर गयी
पर टूटी नहीं ,
जीना फिर शुरू किया
ज़िन्दगी तो आज भी जीती है वो
पर सच्चे प्यार को
आज भी तरसती है वो पगली ......


रेवा


Sunday, May 12, 2013

क्युकी आज तो है मदर्स डे

शायद आपको गलत लगे जो मैंने लिखा है ....कडवा भी लगे ,पर आज बहुत से माता पिता
का सच है ये /


आज तो माँ का दिन है
जिसे कहते हैं मदर्स डे  ,
आज तो कर ले सम्मान
कल चाहे फिर तू कर अपमान ,
आज कर ले उसकी इज्जत
चाहे कल फिर करना बेईज्ज़त ,
आज तो रख ले घर पर उसे
चाहे कल फिर कर देना बेघर ,
आज तो उसे दे कुछ उपहार
चाहे कल करना उपहास ,
आज तो उसके दूध की लाज रख ले
क्युकी आज तो है मदर्स डे ............

रेवा


Thursday, May 9, 2013

तुम्हारा खो जाना

क्या तुम्हे पता है
तुममे तुमको मैं कितना
तलाश करती हूँ आजकल ,
कहीं गुम से गए हो
क्यों कहाँ कैसे
पता नहीं ?
मैंने तो तुममे खो कर
अपना वजूद पाया  ,
पर तुमने तो खुद को ही
खो दिया ,
पर मैं भी हार नहीं मानने वाली
तुम्हे तुमको लौटा कर ही
दम लुंगी ,
आखिर इसमे मेरा भी तो स्वार्थ है ,
"तुम्हे तुमको लौटा कर
मुझे मैं मिल जाऊँगी  "

रेवा


Sunday, May 5, 2013

कविता का संसार

गजब है ये कविता का संसार भी
रुलाता है , हँसाता  है 
अनेक तरह की
अनुभूतियाँ कराता है ,
कभी पढ़ कर लगता है 
ये पंक्तियाँ मेरे लिए ही
लिखी गयी  है ,
कभी लगता है काश 
ऐसा हम भी लिख पाते ,
कभी कभी तो
भाव इतने गहरे होते हैं की  
मन कुछ देर 
वहीँ गोता लगाता रहता है ,
और कभी 
सच मे आंसू बहने लगते हैं ,
पर जैसा भी है 
बहुत प्यारा है ये  संसार। 

रेवा 



Friday, May 3, 2013

अनुपम संगम



एक मैं हूँ कि
दावा करती रहती हूँ
अपने प्यार का ,
और एक तुम हो
जिसने मुझे एक पल मे
पराया कर दिया ,
कितना अनुपम संगम है
मेरे अनुराग और
तुम्हारे विराग का /

रेवा


Tuesday, April 30, 2013

शंका

रात जब नींद नहीं आती
करवटें बदलते-बदलते
जाने क्यों तुम याद आने
लगते हो ,
मन तुम्हारे एहसासों से
भीग उठता है ,
दूर होते हुए भी
तुम्हारे बाँहों के घेरे मे
सिमट जाती हूँ ,
ऐसा लगता है
तुम मेरे पास ही हो ,
पर कभी कभी
एक शंका भी घेर लेती है कि,
जितनी शिद्दत से मैं
तुम्हे महसूस करती हूँ
क्या तुम तक वो एहसास
पहुँचते हैं ?
पर अगले ही पल
जब जवाब बन कर
तुम ख्वाबों मे आ जाते हो तो
सारी शंकाएं दूर हो जाती है ,
और रह जाता है बस
प्यार भरा एहसास /

रेवा



Wednesday, April 24, 2013

हर तरफ हैवानी ही हैवानी ............

आँखों से बरसे अंगार
रोये हम जार जार 
देख दशा उस बच्ची की 
हो गए सब शर्मसार ,
कैसी दुनिया दी है हमने 
अपने बच्चों को ?
जहाँ इज्जत हो रही 
तार तार 
हर बार सरे बाज़ार ,
न बचपन रहा 
न जवानी 
अब तो हर तरफ 
बस हैवानी ही हैवानी ............

रेवा 

Sunday, April 21, 2013

आखिर कब तक ??

पता नहीं क्या हो गया है
इंसानों को ?
छोटे बच्चों को तो हम
भागवान मानते हैं
उनके साथ ऐसा अत्याचार ,
आज बच्चों को बहार
भेजने मे डर लगने लगा है ,
उन्हें जाने अनजाने हम बाँधने लगे हैं
यहाँ मत जाओ
वहाँ मत खेलो
अकेले कहीं न जाओ
ये मत पहनो
वो मत पहनो ,
पर क्या इन सब से भी
कुछ असर हो रहा है
नहीं ,
आये दिन एक नयी घटना
और  उस पर नयी बेहेस  ,
कोई किसी को दोष देता है
कोई किसी को ,
पर ये कोई नहीं समझता की
आज बच्चों से उनका
बचपन छिन लिया गया है
जाने या अनजाने
माँ बाप भी डरे सहमे रहने लगे हैं ,
कितना भी खुद मे
जोश भर लो
हिम्मत दिखा दो
पर अन्दर से सब डरे हुए ,
पर कब तक जियेंगे
हम और हमारे बच्चे
ऐसी ज़िन्दगी
आखिर कब तक ??
कैसे बदलेगा ये समाज
और लोगों नजरिया ??

रेवा

Wednesday, April 17, 2013

पारो की व्यथा

औरतें हर दिन जीती है ,हर दिन मरती है
रोज़ नयी लड़ाई लडती है ,पर फिर भी कहाँ कुछ बदलता है /
अगर मर्द कुछ करे तो ,उसकी माफ़ी सहज ही मिल जाती है
पर अगर वहीँ औरत ऐसी गलती करे तो वो अपराध , क्यों ?


बहुत प्यार करती थी पारो अपने पति से
तन मन धन से सेवा करती
पति ,घर और बच्चो की,
शारीर कभी साथ देता
कभी नहीं भी ,
फिर भी एक उफ़ तक नहीं करती थी
क्युकी उसे लगता था की उसका पति उससे
बहुत प्यार करता है ,
पर जब एक दिन सच जाना
आँखों से सब देखा
टूट गयी वो ,
आँखों से आंसू की जगह
लहू बहने लगे ,
पति से पुछा तो
समझा बुझा कर चुप करा दिया उसे ,
करती भी क्या ,
कहाँ जाती बच्चों का मुँह
देख कर चुप हो गयी ,
घुलती रही रोज़
टूटती रही रोज़ फिर भी जीती रही ,
न घर वालों ने बात जान कर कुछ कहा
न दोस्तों ने
बल्कि सब ने पारो को ही समझाया ,
पर प्रश्न ये है
अगर गलती पारो ने की होती तो
क्या तब
उसके साथ भी ऐसा ही व्यवहार होता ?


रेवा





Tuesday, April 16, 2013

टुटा विश्वाश

मन टुटा
तन टुटा
टुटा है विश्वाश ,
न जाने फिर कब हो
जीने की आस ,
क्यों करते हैं लोग ऐसा
जाने क्या है बात ?
क्या उन्हें नहीं चाहिए
अपनों का साथ ?
नया ज़माना
नए लोग
नयी है उनकी सोच ,
टूटे काँच
कभी न जुड़ता
न जुड़ता विश्वाश /

रेवा