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Monday, August 7, 2017

(संस्मरण 2) चाय






हम सब के लिए चाय एक मामूली सी चीज है। जब मन किया पी लिया, नही पसंद आई तो फेंक भी दिया बिना एक पल सोचे। पर चाय एक गरीब के लिए क्या है? ये उससे बेहतर कोई बयां नही कर सकता।
अभी कुछ दिनों पहले शाम को सियालदाह स्टेशन गयी थी बेटे को ट्रेन में बिठाने, ट्रैन आने में अभी कुछ समय था तो हम इन्तज़ार कर रहे थे। शाम का समय था, चाय पीने की इच्छा हो गयी तो मैं और मेरे पति स्टेशन में टी स्टाल ढूंढने लगे, जो पास ही मिल गया।

उससे दो कप चाय ले कर हम दोनों बात करते हुए पीने लगे, इतने में मैंने देखा एक भिखारी पैंतीस - चालीस के करीब का इधर ही आ रहा था, जो की स्टेशन पर सामान्य सी बात थी। वो आया और कूड़ेदान मे हाथ डाला, मुझे लगा कूड़ा ज्यादा है तो उठाने आया होगा। पर मैं कुछ समझ पाती, इससे पहले मैंने देखा उस भिखारी ने तेज़ी से सात - आठ खाली चाय पिये हुए कप के टी-बैग निकाले उन्हें एक कप में निचोड़ा और पी लिया, और जैसे मौज में आया था वैसे ही चला गया। मैं बुत सी खड़ी उस तरफ देखती रह गयी ..... पर जाते - जाते वो अपने साथ मेरे चाय का स्वाद भी ले गया  ....... #ज़िन्दगी

6 comments:

  1. बहुत मार्मिक

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (09-08-2017) को "वृक्षारोपण कीजिए" (चर्चा अंक 2691) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. जिसे जो चीज नही मिलती वो ही उस चीज का महत्व समझ सकता हैं। सुंदर प्रस्तुति।

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